खरमास दिसम्बर 2021 में कब से
खरमास / मलमास 2021 दिसम्बर में कब से !
हिंदू धर्म में खरमास का विशेष महत्व माना गया है. खरमास को मलमास के नाम से भी जाना जाता है. खरमास की अवधि एक माह की होती है. खरमास को आध्यात्मि कार्य करने के लिए उत्तम माना गया है. खरमास में धार्मिक कार्य करने से जीवन में आने वाले कष्टों से मुक्ति मिलती है. खरमास को भगवान विष्णु का प्रिय मास भी कहा गया है.
खरमास क्या है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब जब सूर्य बृहस्पति की राशि धनु राशि या मीन राशि मे प्रवेश करते हैं तो खरमास आरंभ होते हैं. खरमास में मांगलिक कार्य, विवाह और यज्ञोपवित जैखरमास 20से कार्य नहीं किए जाते हैं. खरमास में पूजा पाठ आदि का विशेष महत्व बताया गया है. इस मास में भगवान की उपासना और भजन करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है.
Kharmas 2021: सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने के साथ ही 14 दिसंबर से खरमास प्रारंभ हो जाएगा। इसे मलमास भी कहा जाता है। खरमास 14 जनवरी 2021 तक चलेगा। खरमास में विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश आदि मांगलिक कार्य नही किये जाते हैं ।
क्या होता है मलमास या खरमास
सूर्य जब-जब बृहस्पति की राशियों धनु और मीन में प्रवेश करता है तब मलमास होता है क्योंकिसूर्य के कारण बृहस्पति निस्तेज हो जाते हैं। इसलिए मलमास में सभी शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश आदि नहीं किए जाते हैं क्योंकिशुभ कार्यो के लिए बृहस्पति का साक्षी होना आवश्यक है। इस मास में किसी नए कार्य की शुरुआत करना उत्तम नहीं होता है। सगाई, गृह निर्माण प्रारंभ, नवीन गृह प्रवेश आदि भी नहीं किए जाते हैं।
क्या करें मलमास में
मलमास दान-पुण्य के लिए सर्वश्रेष्ठ समय होता है। इस समय में किए गए दान-पुण्य का अधिक फल प्राप्त होता है। इस मास में गरीबों को अन्नदान, भोजनदान, वस्त्र दान आदि करना चाहिए। इससे अशुभ ग्रहों की पीड़ा दूर होती है। यह मास जप-तप आदि के लिए भी उत्तम होता है। इस माह में ईष्ट का ध्यान, पूजन, मंत्र जप सर्वसिद्धिदायक होता है। नवग्रह हवन करने से ग्रह दोष दूर होते हैं ।
मकर संक्रांति पर समाप्त होगा मलमास
सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही मलमास समाप्त हो जाता है। यह दिन 14 जनवरी 2022 है। मकर संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान करके दान-पुण्य करना चाहिए। इस दिन तिल का सेवन करने से वर्ष भर आयु और आरोग्य में वृद्धि होती है। मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण होते हैं जो देवताओं का दिन माना जाता है। उत्तरायण की अवधि छह माह होती है।
@आचार्य रामसुशील मिश्र
9454793214
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